Wednesday, 29 July 2026

बेमानी जंग

 (विधाता छंद)


बेमानी जंग


न ये माने न वो माने, हुए बेतौर मनमाने।

छिड़ी है जंग सागर में, पिट रहे देश बेगाने।

करे कोई भरे कोई, परेशानी गजब की है।

समंदर जो सभी के थे, लगे हैं लोग कब्जाने।


जहाजों को डराते हैं, बमों की बारिशें करके।

रुका है तेल का जाना, बमों की मार से डर के।

बढ़े हैं भाव मनमाने, टंकियाँ तेल की सूखी।

न जाने कब रुकेंगे बम, रुकेंगे शाम या तड़के ।।

18/7/26       ~अजय 'अजेय'।

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