(चित्र-लेखन)
(मनोरम छंद)
कर्तव्यनिष्ठ
माथ पर गट्ठर उठाते।
पाँव में पत्थर चुभाते।
जिंदगीकी दौड़ बाबा।
जिंदगी भर हैं लगाते।।
है यही बस आस मन की।
पूत की बन जाय जिनगी।
पूर कर दूँ लिख पढ़ा कर।
जान है जब तलक तन की।।
25/7/26 ~अजय 'अजेय'।
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