Wednesday, 1 July 2026

ईंधन की किल्लत


(चित्र-लेखन)

(कुण्डलिया छंद)


ईंधन की किल्लत

ईंधन की किल्लत भई,

मिले  न डीजल तेल,

बचे खेत कैसे जुतें,

मिलें नहीं हल-बैल।

मिले नहीं हल-बैल,

किसानी होये कैसे।

बैल नदारद हुए,

नहीं अब पलते भैंसे।

खुद काँधे पर लिये,

उठा हल भाई झिंगन।

बनना ही था बैल,

नहीं जब मिलता ईंधन।।

6/6/26          ~अजय 'अजेय'।

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