(चित्र-लेखन)
(कुण्डलिया छंद)
ईंधन की किल्लत
ईंधन की किल्लत भई,
मिले न डीजल तेल,
बचे खेत कैसे जुतें,
मिलें नहीं हल-बैल।
मिले नहीं हल-बैल,
किसानी होये कैसे।
बैल नदारद हुए,
नहीं अब पलते भैंसे।
खुद काँधे पर लिये,
उठा हल भाई झिंगन।
बनना ही था बैल,
नहीं जब मिलता ईंधन।।
6/6/26 ~अजय 'अजेय'।
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