तन्हाई की घड़ियों में.......
Sunday, 2 August 2026
बालपन के खेल
(चित्र-लेखन)
प्रमाणिका छंद
बालपन के खेल
न फोन है न मौन है।
रचा जिसे इ कौन है।
कुरेद के हटा रहे।
दबा, रहे, सटा रहे।।
गिरा उसे सना रहे।
सजा धजा बना रहे।
न हींग है न तेल है।
सधी नदी व खेल है।।
01/08/26 ~अजय 'अजेय'।
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