यहाँ नहीं मिलता
सभी को तो, सभी कुछ, यहाँ नहीं मिलता।।
सूख जाती हैं हजार कलियाँ बाग में।
उम्मीद का हर गुल यहाँ नहीं खिलता।।
उखड़ जाते हैं, बड़े शजर तूफानों में।
आँधियों से कई बार मगर, पत्ता नहीं हिलता।।
डुबा सकती हैं, उफनती लहरें, कश्तियों को।
'अजेय' हर लहर को, साहिल यहाँ नहीं मिलता।।
कभी शबरी को वो मिलता है, कभी मीरा को।
जाने कहाँ वो रहता है, मुझको कहीं नहीं मिलता।।
15/10/26 ~अजय 'अजेय'।
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