आजादी का जश्न मनाने निकला हूँ,
संविधान का अर्थ बताने निकला हूँ,
आओ मिल कर कदम बढ़ायें आगे हम,
बंधुजनों से हाथ मिलाने निकला हूँ।।
'सम-विधान' का आओ विश्लेषण कर लें,
'सम' का अर्थ 'बराबर' है, मन में धर लें,
है विधान यदि सम, हम सबकी ही खातिर,
'यू सी सी' को तन मन धन से हम वर लें।।
बढ़ते बच्चों को सतर्क परिवीक्षा दें,
युवाशक्ति को संस्कार की शिक्षा दें,
नज़र रहे उनको बहकाने वालों पर,
तर्कपूर्ण ही राजनीति की दीक्षा दें।।
हो विरोध भी तो, सम्मानित बानी हो,
ना हो तोड़-फोड़, ना ही मनमानी हो,
भाषण में हो शील, न कोई गाली हो,
कृत्यों में भी मर्यादा का पानी हो।।
15/8/26
~अजय 'अजेय'।
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