युद्धविराम पर प्रश्न ?
(दोहा छंद)
रुके युद्ध पर मच रहा, भारी बड़ा बवाल।
जिसको देखो कर रहा, हम से यही सवाल।।
काहे रोका वेग को, करते मटियामेट।
आया था मौका सही, अब तक जिसका वेट।।
बात सही है आपकी, सबको यही सुहाय।
लेकिन कुछ बातें यहीं, मेरी समझ न आय।।
जीत मिले तो साथ में, मिलता है कुछ रोग।
माटी पर कब्जा मिले, साथ मिलें कुछ लोग।।
साथ मिलेंगे जो हमें, क्या तुमको मंजूर ?
आधे भूखे पेट के, आधे भूखे हूर।।
हुये अलग थे चाह कर, हमसे पाले बैर।
आज मिलेंगे जब हमें, चाहेंगे वे खैर ?
पाल सकोगे साँप तुम, घर में लाकर आज ?
रोज खुजाते फिरेंगे, लेकर खुजली खाज ?
जल्दीबाजी मत करो, नहीं बिगाड़ो काम।
ऋतु आये फल मिलेंगे, मिर्ची केला आम।।
थोड़ी थोड़ी चोट दो, रुक रुक सीमा पार।
मौत मरेंगे आप ही, सब हूरों के यार।।
खेल नहीं यह युद्ध है, नियम न जैसे खेल।
दर्द न मिटते साल तक, मलते रहिये तेल।।
19/5/25 ~अजय 'अजेेेय'।
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