हमारा भारत
(विधाता छंद)
सँवारा है जिसे हमने, निराला देश है मेरा।
निराई कर गुड़ाई कर, सजाया बाग का घेरा।
पतंगे-कीट मारेंगे, अगर आयें हमारे घर।
जमाने अब नहीं देंगे, किसी को हम यहाँ डेरा।।
समझ लें आप भी, सब को,समझ में बात ये आये।
न कोई दे हमें धमकी, न भोली बात फुसलाये।
जिसे भारत सुहाता हो, यहाँ के गीत वो गाये।
नहीं तो बाँध कर बिस्तर, जहाँ भाये वहीं जाये।।
4/10/24 अजय 'अजेय'।
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