Thursday, 11 October 2018

हमार हो गईल

हमार हो गईल... 


अँगुरी में डारि के मुंदरिया,
सँवरिया हमार हो गईल।

कवनों काम-काजे,अब मनवां न लागे,
उड़ि मन-तोतवा, उनहिं लगे भागे,
दिनवां न बीते, राति नीनियो न भावे,
केतनो सहेजीं, जिया क़ाबू नाहीं आवे,
जान मारे, चाँद के अँजोरिया,
बैरी....... बयार हो गईल।

बैरनि लागे हमके, फूलवा के बगिया,
जियरा सतावेला, कोईलिया के रगिया,
पूजा में न ध्यान, नाहीं भावे हमरा जगिया,
चादरा,बिछावन, नीक लागे नाहीं तकिया,
गावे लगलीं, सावन में कजरिया,
सँवरिया से प्यार हो गईल।

लिखल-पढ़ल फ़ेल, कवनों बात ना बुझाला,
फिरि-फिरि हियवा का, पियवे सोहाला,
सखियन के साथ भारी, बोझ बनि जाला,
मनवां हमार अब, मने-मन लजाला,
झूकि-झूकि, जाले ई नजरिया, 
नयनवा के वार हो गईल।

अंगुरी में डारि के मुंदरिया,
सँवरिया हमार हो गईल।

11 अक्टूबर 2018       ~~~ अजय।



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